सिंगरौली में NCL से एक समान विस्थपान लाभ की मांग, सैकड़ों विस्थापित पहुंचे कलेक्टर के पास. 22 हजार मकान गिराने की है तैयारी.
सिंगरौली: कोयला खदान के विस्तार को लेकर मोरवा क्षेत्र में एनसीएल कंपनी द्वारा लोगों को विस्थापित किया जा रहा है. जिसमें 22,000 मकान गिराने की तैयारी है. इससे 50 हजार से अधिक लोग प्रभावित होंगे. लेकिन विस्थापितों में विस्थापन रकम को लेकर काफी असंतोष दिख रहा है. आरोप है कि विस्थापन राशि को लेकर भेदभाव किया जा रहा है. जबकि ग्रामीणों की मांग है कि जमीन अधिग्रहण में पट्टाधारी विस्थापित हो या गैर-पट्टाधारी विस्थापित सबको एक समान विस्थापन राशि दिया जाए.
सैकड़ों विस्थापित कलेक्टर के पास पहुंचे
बुधवार को सैकड़ों विस्थापित अपनी मांग को लेकर कलेक्टर गौरव बैनल से मिलने पहुंचे. उन्होंने एक समान विस्थापन का लाभ दिए जाने की मांग की. विस्थापितों का कहना है कि इससे पहले भी एनसीएल (नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड) के द्वारा ही जमीन अधिग्रहण किया गया, जिसमें पट्टाधारी विस्थापित हो या गैर पट्टाधारी विस्थापन सबको एक समान लाभ मिला है. इस पर कलेक्टर गौरव बैनल ने पूरी पारदर्शिता से विस्थापन लाभ दिए जाने का आश्वासन दिया है.
दोहरी नीति से विस्थापन लाभ देने का आरोप
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे बीपी पटेल ने बताया कि "पूर्व में भी एनसीएल की जयंत परियोजना के विस्तार के लिए विस्थापन हुआ था. जहां विस्थापन में पट्टाधारी एवं गैर पट्टाधारी सभी परिवार को एक समान विस्थापन लाभ दिया गया था. लेकिन इस विस्थापन प्रक्रिया में एनसीएल प्रबंधन दोहरी नीति से कार्य कर रहा है और पट्टाधारी और गैर पट्टाधारी विस्थापितों को एक समान लाभ नहीं दे रहा है."
विस्थापितों ने बताया कि गैर पट्टाधारी परिवारों को 5 लाख विस्थापन राशि और 6 लाख प्लॉट राशि दी जा रही है. वहीं, दूसरी ओर पट्टाधारी परिवारों को 15 लाख विस्थापन राशि एवं 18 लाख प्लॉट राशि दी जा रही है.

नए जगह बसने की बड़ी चुनौती
गैर-पट्टाधारी विस्थापितों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि 40- 50 वर्षों से जिस जमीन पर अपना घर बनाकर गुजारा कर रहे थे, उसे अब छोड़ना पड़ेगा और कहीं दूसरी जगह पर जाकर बसना पड़ेगा. अब अगर एनसीएल प्रबंधन भी एक समान विस्थापन लाभ नहीं देता तो उनके सामने नई जगह बसना बड़ी चुनौती होगी. इसलिए उनका कहना है कि डीएम से गुहार लगाई है कि कम से कम एक समान विस्थापन लाभ मिल जाए, तो बहुत राहत होगा.
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इस पूरे मामले पर कलेक्टर गौरव बैनल ने कहा कि "अपनी कुछ मांग को लेकर विस्थापित आए थे. उनकी बात और मांग को गंभीरता से सुना और समझा है, जिसे लेकर एसडीएम को निरीक्षण कर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं. जो भी नियम में उचित होगा वह किया जाएगा और विस्थापन का पूरा लाभ दिया जाएगा.
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